UA-166045260-1 क्या योग मुसलमानों के लिए हराम है? - Islamic Way Of Life

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Thursday, 27 August 2020

क्या योग मुसलमानों के लिए हराम है?

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योग मुसलमानों के लिए हराम है या नहीं ये जानने के लिए हमें दो चीजों के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है कि योग क्या है और हराम क्या है? 
        सबसे पहले बात करेंगे हराम की! इस्लाम में कोई भी काम सर्वशक्तिमान "अल्लाह त आला" के नाम से शुरू होता है, जो कि पूरी दुनिया का मालिक है। हर वो चीज जिसमें "अल्लाह" को छोड़कर किसी सजीव या निर्जीव की उपासना की बात की गई है वह हराम है। फिलहाल यहां खाद्य पदार्थों और कमाई के संदर्भ में बात नहीं हो रही है। 
         अब बात करते हैं योग की! योग के संदर्भ में कहा जाता है कि आत्मा का परमात्मा से मिलन योग है।जबकि यह सरासर मिथ्या है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार इंसान कि रूह का ईश्वर के साथ मिलन मरने के पश्चात होगा। असल में योग मात्र एक व्यायाम है लेकिन फिर भी उसमें सूर्य की उपासना की जाती है और मंत्रों का उच्चारण करके सूर्य को सर्वशक्तिमान ईश्वर के तुल्य बताया जाता है।

           योग हराम है या नहीं?

असल में योग एक व्यायाम है और स्वस्थ शरीर के लिए व्यायाम अतिआवश्यक है। व्यायाम स्त्री - पुरुष,बूढ़े - बच्चे,हिंदू - मुस्लिम कोई भी कर सकता है। इस बात पर सभी एकमत हैं। लेकिन व्यायाम को धर्म से जोड़कर उसमें एक ईश्वर के इतर किसी और की उपासना करना गलत है। अगर साधारण तौर पर योग के आसन को व्यायाम के तौर पर किया जाए तो कोई दिक्कत नहीं है।

         इस्लाम में पांच वक्त नमाज पढ़ने का हुक्म है अगर कोई व्यक्ति दिन में पांच वक्त नमाज पढ़ता है और साथ ही अपने दैनिक कार्यों को भी भली भांति कर रहा है तो उसे किसी भी व्यायाम कि आवश्यकता नहीं होगी। यदि कोई ऐसा काम करता है जिसमें उसको दिन भर या तो कुर्सी पर बैठना होता है या कम्प्य़ूटर स्क्रीन के सामने बैठना पड़ता है तो वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने हेतु व्यायाम का सहारा ले सकता है या यूं कहें उसे व्यायाम करना जरूरी है।


2 comments:

  1. Aap sahi nahi hain. Yog ek exercise hai beshak yog ko hindu dharm se jodkar log dekhte hain lekin. Yog jaisi aur bahut se exercise hain jo duniya ke baki hisso me hote hain yaha tak ki muslim country me bhi. Exersise haram nahi ho sakta. Uske naam par kiya gaya shirk haram hota hai.

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