UA-166045260-1 जब मलकुल मौत हिंदुस्तान आये - Islamic Way Of Life

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Monday, 26 April 2021

जब मलकुल मौत हिंदुस्तान आये

 हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम के दौर में एक शख्स उनके दरबार में बैठा हुआ था। उसने देखा कोई अजनबी आया और उस सख्श को घूर घूर कर देखने लगा। इस सख्श को ये बात बहुत अजीब लगी। जब वो अजनबी वहां से चला गया तो इस सख्श ने हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम से पूछा,"ये अजनबी कौन था?" और मुझे इतना घूर कर क्यों देखे जा रहा था?

इसपर हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने फरमाया ये मलकुल मौत थे। ये बात सुनकर वो सख्श बहुत डर गया कि कहीं मेरी मौत का दिन तो नजदीक नहीं आ गया? उसने हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम से मिन्नतें करनी शुरू कर दी। आपका तो हवाओं पर भी अख्तियार है आप मुझे हवाओं के जरिए यहां से दूर हिंदुस्तान भेज दीजिए। ताकि मै मलकुल मौत से पीछा छुड़ा सकूं। 

हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने उस सख्श को हवाओं के जरिए हिंदुस्तान भेज दिया। सुबह जब मलकुल मौत से दोबारा मुलाकात हुई तो हजरत सुलेमान अलैहिस्सलाम ने पूछा कि आप इस सख्श को ऐसे क्यों देख रहे थे? वो डर गया था। 

इसपर मलकूल मौत ने जवाब दिया," मुझे हुक्म मिला था इस सख्श की रूह हिंदुस्तान की सरजमीं पर कब्ज करनी है।" 

मै यही सोच रहा था कि अगर ये घोड़ों पर बहुत तेज रफ्तार से भी सवारी करेगा तब भी सुबह तक ये हिंदुस्तान नहीं पहुंच पाएगा। 

लेकिन डर के मारे उसने यहां से दूर हिंदुस्तान जाने का तसव्वुर किया और मेरा काम आसान हो गया। 


"कुल्लू नफसीन जाएकतुल मौत" मौत बरहक है। हर किसी को उसके मुकर्रर दिन और जगह पर मरना है। हमे बस इतना कोशिश करना चाहिए कि हमारा खात्मा ईमान पर हो और मरने से पहले कलमा पढ़ना नसीब हो।



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