UA-166045260-1 जन्नती लाठी - Islamic Way Of Life

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Sunday, 2 May 2021

जन्नती लाठी

 जन्नती लाठी

Jannati-lathi


 यह हजरते मूसा अलैहिस्सलाम की वह मुकद्दस लाठी है जिसको "असाए मूसा" कहते हैं इसके जरिए आप के बहुत से उन मोजिजात का जुहूर हुआ जिनको कुरआने मजीद ने मुख्तलिफ उनवानों के साथ बार बार बयान फरमाया है।


इस मुकद्दस लाठी की तारीख बहुत कदीम है जो अपने दामन में सैकड़ों उन तारीखी वाकियात को समेटे हुए है जिन में इबरतों और नसीहतों के हजारों निशानात सितारों की तरह जगमगा रहे हैं जिन से अहले नजर को बसीरत की रोशनी और हिदायत का नूर मिलता है। 

यह लाठी हजरते मूसा अलैहिस्सलाम के कद बराबर दस हाथ लम्बी थी। और इसके सर पर दो शाखें थीं जो रात में  मशाल की तरह रोशन हो जाया करती थीं। ये जन्नत के दरख़्त पीलू की लकड़ी से बनाई गई थी और इसको हजरते आदम अलैहिस्सलाम बेहीश्त से अपने साथ लाए थे। 

चुनांचे हजरते सय्यद अली अजहूरी अल.रह. ने फरमाया कि:-

jannat-lathi



हजरते आदम अलैहिस्सलाम के साथ ऊद (खुशबूदार लकड़ी) हजरते मूसा अलैहिस्सलाम का असा (जो इज्जत वाली पीलू की लकड़ी का था), अंजीर की पत्तियां, हजरते अस्वद जो मक्कए मुअज्जमा में है और नबिये मुअज्जम हजरते सुलेमान अलैहिस्सलाम की अंगूठी यह पांच चीजें जन्नत से उतारी गई।


हजरते आदम अलैहिस्सलाम के बाद यह मुकद्दस असा हजरते अंबियाए किराम अलैहे सलातु वस्सलाम  को यके बा'द दिगरे बतौरे मिराष के मिलता रहा। यहां तक कि हजरते शोएब अलैहिस्सलाम को मिला जो " कौमे मदयन" के नबी थे जब हजरते मूसा अलैहिस्सलाम मिस्र से हिजरत फरमा कर मदयन तशरीफ ले गए और हजरते शोएब अलैहिस्सलाम ने अपनी साहिबजादी (हजरते बीबी सफूरा रजी.) से आप का निकाह फरमा दिया। और आप दस बरस तक हजरते शोएब अलैहिस्सलाम की खिदमत में रहकर आप की बकरियां चराते रहे। उस वक्त हजरते शोएब अलैहिस्सलाम ने हुक्मे खुदावंदी के मुताबिक आप को यह मुकद्दस "असा" अता फरमाया।

फिर जब अपनी जौजए मोहतरमा को साथ ले कर मदयन से मिस्र अपने वतन के लिए रवाना हुए और वादिए मुकद्दस मकामे "तुवा" में पहुंचे तो अल्लाह तआला ने अपनी तजल्ली से आप को सरफराज फरमा कर मंसबे रिसालत के शरफ से सरबुलंद फरमाया। इस वक्त हजरते हक़ ने आप से जिस तरह कलाम फरमाया कुराने मजीद ने उस को इस तरह बयान फरमाया कि:

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  १७

وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَٰمُوسَىٰ

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  १८

قَالَ هِىَ عَصَاىَ أَتَوَكَّؤُا۟ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِى وَلِىَ فِيهَا مَـَٔارِبُ أُخْرَىٰ


"और यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है? ऐ मूसा! 

अर्ज की: यह मेरा असा है, मैं इस पर तकया (टेक व सहारा) लगाता हूं और इस से अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूं और मेरे इसमें और काम हैं। 

(दूसरे कामों) की तफसीर में हजरते अल्लामा अबुल बरकात अब्दुल्लाह बिन अहमद नसफी अल. ने फरमाया कि मसलन: (1) उसको हाथ में लेकर उसके सहारे चलना (2) उससे बातचीत कर के दिल बहलाना (3) दिन में उसका दरख़्त बन कर आप पर साया करना (4) रात में उस की दोनो शाखें का रोशन हो कर आप को रोशनी देना (5) उस से दुश्मनों, दरिंदों और सांप बिच्छुओं को मारना (6) कुएं से पानी भरने के वक्त उसका रस्सी बन जाना और उस की दोनो शाखों का डोल बन जाना (7) ब वक्ते जरूरत उसका दरख़्त बन कर हस्बे ख्वाहिश फल देना (8) उस को जमीन में गाड़ देने से पानी निकल पड़ना वगैरा।

हजरते मूसा अलैहिस्सलाम इस मुकद्दस लाठी से मजकूरा बाला काम निकालते रहे मगर जब आप फिरौन के दरबार में हिदायत फरमाने की गरज से तशरीफ ले गए और उसने आपको जादूगर कह कर झूठलाया तो आपके इस असा के जरिए बड़े-बड़े मोजिजात का जुहुर शुरू हो गया, जिनमें से तीन मोजिजात का तजकिरा कुरआने मजीद ने बार बार फरमाया जो हस्बे जैल हैं।

असा अजदहा बन गया:- इस वाकिया यह है कि फिरौन ने एक मेला लगवाया। और अपनी पूरी सल्तनत के जादूगर को जमा करके हजरत मूसा अलैहिस्सलाम को शिकस्त देने के लिए मुकाबले पर लगा दिया। और उस मेले के इजदीमाह में जहां लाखों इंसानों का मजमा था एक तरफ जादूगरों  का हुजूम अपनी जादूगरी का सामान लेकर जमा हो गया । और उन जादूगरों के फौज के मुकाबले में हजरते मूसा अलैहिस्सलाम तन्हा डट गए।जादूगरों ने फिरौन की इज्जत की कसम खाकर अपने जादू की लाठियों और रस्सियों को फेंका तो एकदम वह लाठियां और रस्सियां सांप बनकर पूरे मैदान में हर तरफ फुंकारे मार कर दौड़ने लगीं और पूरा मजमा खौफ व हिरास में बदहवास होकर इधर उधर भागने लगा और फिरौन और उस के तमाम जादूगर इस करतब को दिखा कर अपनी फतह के घमंड और गुरुर के नशे में बद मस्त हो गए और जोशे शामदानी से तालियां बजा बजा कर अपनी मसर्रत का इजहार करने लगे कि इतने में नागहां हजरते मूसा अलैहिस्सलाम ने खुदा के हुक्म से अपनी मुकद्दस लाठी को उन सापों के हुजूम में डाल दिया तो यह लाठी एक बहुत बड़ा और निहायत हैबत नाक अजदहा बनकर जादूगरों के तमाम सांपों को निगल गया। यह मोजिजा देखकर तमाम जादूगर अपनी शिकस्त का एतराफ करते हुए सजदे में गिर पड़े और बा आवाजे बुलंद यह ऐलान करना शुरू कर दिया " आमन्ना बिरब्बे हारून व मूसा" यानि हम सब हजरते हारून और हजरते मूसा अलैहिस्सलाम के रब पर ईमान लाए। 

चुनांचे कुराने मजीद में इस वाकिए का जिक्र करते हुए इरशाद फ़रमाया कि:

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  ६५

قَالُوا۟ يَٰمُوسَىٰٓ إِمَّآ أَن تُلْقِىَ وَإِمَّآ أَن نَّكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَلْقَىٰ

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  ६७


فَأَوْجَسَ فِى نَفْسِهِۦ خِيفَةً مُّوسَىٰ

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  ६८


قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْأَعْلَىٰ

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  ६९


وَأَلْقِ مَا فِى يَمِينِكَ تَلْقَفْ مَا صَنَعُوٓا۟ إِنَّمَا صَنَعُوا۟ كَيْدُ سَٰحِرٍ وَلَا يُفْلِحُ ٱلسَّاحِرُ حَيْثُ أَتَىٰ

सूरा ता हा (طه), वर्सेज:  ७०


فَأُلْقِىَ ٱلسَّحَرَةُ سُجَّدًا قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ هَٰرُونَ وَمُوسَىٰ


बोले ऐ मूसा या तो तुम डालो या हम पहले डालें, मूसा ने कहा बल्कि तुम्ही डालो जभी उनकी रस्सियां और लाठियां उन के जादू के जोर से उनके खयाल में दौड़ती मालूम हुई तो अपने जी में मूसा ने खौफ पाया,हमने फरमाया डर नहीं बेशक तू ही गालिब है और डाल तो दे जो तेरे दाहिने हाथ में है वह उनकी बनावटों को निगल जाएगा वह जो बनाकर लाए हैं वह तो जादूगर का फरेब है और जादूगर का भला नहीं होता कहीं, तो सब जादूगर सजदे में गिरा लिए गए बोले हम उसपर ईमान लाए जो हारून और मूसा का रब है। 

असा मारने से चश्मे जारी हो गए:- बनी इसराइल का असल वतन मुल्के शाम था लेकिन हजरते यूसुफ अलैहिस्सलाम के दौरे हुकूमत में यह लोग मिस्र में आ कर आबाद हो गए और मुल्के शाम पर कौमे अमालका का तसल्लुत और कब्जा हो गया। जो बदतरीन किस्म के कुफ्फार थे। जब फिरौन दरियाए नील में गर्क हो गया और मूसा अलैहिस्सलाम को फिरौन के खतरात से इत्मीनान हो गया तो अल्लाह तआला ने हुक्म दिया कि कौमे आमालका से जिहाद कर के मुल्क शाम को उन के कब्जे व तसल्लुत से आजाद कराएं। चुनाँचे, आप छह लाख बनी इसराइल की फौज लेकर जिहाद के लिए रवाना हो गए मगर मुल्के शाम की हुदूद में पहुंच कर बनी इसराइल पर कौमे अमालका का ऐसा खौफ सवार हो गया कि बनी इसराइल हिम्मत हार गए और जिहाद से मुंह फेर लिया। इस नाफरमानी पर अल्लाह तआला ने बनी इसराइल को यह सजा दी कि यह लोग चालीस बरस तक "मैदाने तीह" में भटकते और घूमते फिरे और इस मैदान से बाहर न निकल सके। हजरते मूसा अलैहिस्सलाम भी इन लोगों के साथ मैदाने तीह में तशरीफ फरमा थे। जब बनी इसराइल  इस बे आबो गियाह मैदान में भूख व प्यास की शिद्दत से बेकरार हो गए तो अल्लाह ने हजरते मूसा अलैहिस्सलाम की दुआ से इन लोगों के खाने के लिए "मन्न व सलवा" आसमान से उतारा। मन्न शहद की तरह एक किस्म का हलवा था, और सलवा भुनी हुई बटेरें थीं। खाने के बाद जब यह लोग प्यास से बेताब होने लगे और पानी मांगने लगे तो हजरते मूसा अलैहिस्सलाम ने पत्थर पर अपना असा मार दिया तो उस पत्थर में बारह चश्मे फूट कर बहने लगे और बनी इसराइल के बारह खानदान अपने अपने एक चश्मे से पानी लेकर खुद भी पीने लगे और अपने जानवरों को भी पिलाने लगे और पूरे चालीस बरस तक यह सिलसिला जारी रहा। यह हजरते मूसा अलैहिस्सलाम का मोजीजा था जो असा और पत्थर के जरिए जूहूर में आया। कुराने मजीद ने इस वाकिए और मोजिजे का बयान करते हुए इरशाद फ़रमाया कि:- 

सूरा अल-बक़रा (البقرة), वर्सेज:  ६०


وَإِذِ ٱسْتَسْقَىٰ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِۦ فَقُلْنَا ٱضْرِب بِّعَصَاكَ ٱلْحَجَرَ فَٱنفَجَرَتْ مِنْهُ ٱثْنَتَا عَشْرَةَ عَيْنًا قَدْ عَلِمَ كُلُّ أُنَاسٍ مَّشْرَبَهُمْ 


"और जब मूसा ने अपनी कौम के लिए पानी मांगा तो हम ने फरमाया उस पत्थर पर अपना असा मारो फौरन उस में से बारह चश्मे बह निकले। हर गिरोह ने अपना घाट पहचान लिया। 

असा की मार से दरिया फट गया:- हजरते मूसा अलैहिस्सलाम एक मुद्दते दराज तक फिरौन को हिदायत फरमाते रहे और आयात व मोजिजात दिखाते रहे मगर उसने हक को कुबूल नहीं किया बल्कि और ज्यादा उस की शरारत व सरकशी बढ़ती रही। और बनी इसराइल ने चूंकि उसकी खुदाई को तस्लीम नही किया इस लिए उस ने इन मोमिनीन को बहुत ज्यादा जुल्मों सितम का निशाना बनाया। इस दौरान में एक दम हजरते मूसा अलैहिस्सलाम पर वह्य उतरी कि आप अपनी कौम बनी इसराइल को अपने साथ ले कर रात में मिस्र से हिजरत कर जाएं। चुनांचे, हजरते मूसा अलैहिस्सलाम बनी इसराइल को हमराह ले कर रात में मिस्र से रवाना हो गए। 

जब फिरौन को पता चला तो वह भी अपने लश्करों को साथ लेकर बनी इसराइल की गिरफ्तारी के लिए चल पड़ा। जब दोनों लश्कर एक दूसरे के करीब हो गए तो बनी इसराइल फिरौन के खौफ से चीख पड़े कि अब हम तो फिरौन के हाथों गिरफ्तार हो जायेंगे और बनी इसराइल की पोजीशन बहुत नाजुक हो गई क्योंकि इनके पीछे फिरौन का खूंखार लश्कर था और आगे मौजें मारता हुआ दरिया था। इस परेशानी के आलम में हजरते मूसा अलैहिस्सलाम मुतमइन थे और बनी इसराइल को तसल्ली दे रहे थे। जब दरिया के पास पहुंच गए तो अल्लाह तआला ने हजरते मूसा अलैहिस्सलाम को हुक्म फरमाया कि तुम अपनी लाठी दरिया पर मार दो। चुनांचे ज्यों ही आपने दरिया पर लाठी मारी तो फौरन ही दरिया में बारह सड़कें बन गईं और बनी इसराइल उन सड़कों पर चलकर सलामती के साथ दरिया से पार निकल गए। फिरौन जब दरिया के करीब पहुंचा और उसने दरिया की सड़कों को देखा तो वह भी अपने लश्करों के साथ उन सड़कों पर चल पड़ा। मगर जब फिरौन और उसका लश्कर दरिया के बीच में पहुंचा तो अचानक दरिया मौजें मारने लगा और सब सड़कें खत्म हो गई और फिरौन अपने लश्करों समेत दरिया में गर्क हो गया। 

इस वाकिए को कुरआन मजीद में इस तरह बयान फरमाया कि:-

सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६१


فَلَمَّا تَرَٰٓءَا ٱلْجَمْعَانِ قَالَ أَصْحَٰبُ مُوسَىٰٓ إِنَّا لَمُدْرَكُونَ

सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६२


قَالَ كَلَّآ إِنَّ مَعِىَ رَبِّى سَيَهْدِينِ

सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६३


فَأَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنِ ٱضْرِب بِّعَصَاكَ ٱلْبَحْرَ فَٱنفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَٱلطَّوْدِ ٱلْعَظِيمِ

सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६४


وَأَزْلَفْنَا ثَمَّ ٱلْءَاخَرِينَ


सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६६


ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْءَاخَرِينَ


सूरा अश-शुआरा (الشّعراء), वर्सेज:  ६७


إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَءَايَةً وَمَا كَانَ أَكْثَرُهُم مُّؤْمِنِينَ


फिर जब आमना सामना हुआ दोनो गिरोहों का, मूसा वालों ने कहा हम को उन्होंने आ लिया। मूसा ने फरमाया: यूं नहीं बेशक मेरा रब मेरे साथ वह मुझे अब राह देता है। तो हमने मूसा को वह्य फरमाई कि दरिया पर अपना असा मार तो जभी दरिया फट गया तो हर हिस्सा हो गया जैसे बड़ा पहाड़। और वहां करीब लाए हम दूसरों को और हमने बचा लिया मूसा और उसके सब साथ वालों को फिर दूसरों को डुबो दिया बेशक इस में जरूर निशानी है और उन में अक्सर मुसलमान न थे। 

यह है हजरते मूसा अलैहिस्सलाम की मुकद्दस लाठी के जरिए जाहिर होने वाले वह तीनों अजीमुश्शान मोजिजात जिन को कुराने करीम ने मुख्तलिफ अल्फाज और मुतअद्दीद उनवानों के साथ बार बार बयान फरमा कर लोगों के लिए इबरत और हिदायत का सामान बना दिया।


Invitation Card पर लिखे शब्द R.S.V.P. और W.B.C.F का मतलब- Click Here

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