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Thursday, 7 July 2022

हैदराबाद या भाग्यनगर क्या था पुराना नाम?

 हैदराबाद या भाग्यनगर क्या था पुराना नाम?

Hyderabad char minar
बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद को भाग्यनगर कहकर संबोधित किया। कई शहरों के नाम बदल चुके यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी तेलंगाना की राजधानी को इसी नाम से संबोधित किया था। बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों की माने तो हैदराबाद का असली नाम भाग्यनगर ही था लेकिन विरोधियों का दावा है कि ये काल्पनिक बातें हैं।
आइए जानते हैं हकीकत क्या है? 


दरअसल 16वीं शताब्दी में मोहम्मद कुली कुतुबशाह गोलकुंडा के शासक थे। उसी दौरान उन्हें भागमती नाम की लड़की से उनको प्रेम हो गया और उन्होंने इस लड़की से विधिवत विवाह संपन्न कर ली। चूंकि वो भागमति से अत्यंत प्रेम करते थे इसलिए उपहार स्वरूप भागमति के लिए मूसा नदी के किनारे एक शहर बसाया और उसका नाम भागनगर रखा। मूसा नदी को वर्तमान समय में मूसी नदी के नाम से जाना जाता है। यह शहर कुतुबशाह और भागमती के प्रेम की निशानी के तौर पर जाना जाता है। ठीक उसी तरह जैसे ताजमहल शाहजहां और मुमताज महल के प्रेम की निशानी के तौर पर याद किया जाता है। 


लेकिन सवाल यह है कि भागनगर से हैदराबाद नाम कैसे हुआ। इसके पीछे की कहानी यह है कि भागमती ने शादी करने के बाद इस्लाम कुबूल कर लिया था और अपना नाम हैदर बेगम रख लिया था। इसीलिए भागमाती के नए नाम हैदर बेगम के नाम पर शहर का नाम पड़ा। चूंकि हैदर बेगम ने इस शहर को आबाद किया इसलिए वहां की जनता इस शहर को अब हैदर आबाद यानी हैदराबाद कहने लगे। और धीरे धीरे यही नाम प्रचलित हो गया। 


एक किवदंती के अनुसार कहा जाता है कि भागमति को बाग बगीचों से बहुत प्यार था इसलिए मोहम्मद कुली कुतुबशाह ने भागमती के लिए इस शहर में ढेर सारे बाग लगवा दिए थे जिसके कारण इस शहर को बागों का नगर अर्थात बाग नगर कहा जाने लगा था लेकिन बाद में वहां की स्थानीय जनता इस शहर को हैदर बेगम द्वारा आबाद किए जाने वाले शहर हैदराबाद के नाम से पुकारने लगी। तभी से इस शहर का नाम हैदराबाद पड़ गया।।


हैदराबाद मोहब्बत का प्रतीक है। यहां चार मीनार अपनी एक अलग छाप छोड़ता है जो दर्शकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करता है। यहां के भोजन पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। जैसा कि हम और आप जानते ही हैं कि हैदराबाद की बिरयानी का क्या महत्व है वहीं यहां को सुप्रसिद्ध व्यंजन हलीम पूरी दुनियां में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है। भारत के कुछ हिस्सों तथा दुनियां के हिंदी उर्दू भाषी देशों में भी हैदराबादी भाषा के दीवाने देखने को मिलेंगे। अतः हम कह सकते हैं कि हैदराबाद अपने आप में एक अलग छाप छोड़ता है जो हमारे देश के इस कथन को साकार करता है। 
पांच कोस पर पानी बदले पांच कोस पर बानी।

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